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असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर् मा अमृतं गमय
ॐ शांति शांतिशांति - !!

बृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28.!!

Lead Us From the Unreal To Real,
Lead Us From Darkness To Light,
Lead Us From Death To Immortality,
Aum (the universal sound of God)
Let There Be Peace Peace Peace.

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आदित्यचन्द्रावनिलोऽनलश्र्चद्यौर्भूमिरापो हॄदयं यमश्र्च 
अहश्र्च रात्रिश्र्च उभे च संध्ये धर्माेऽपि जानाति नरस्य वॄत्तम् ! महाभारत !

सूर्य , चन्द्र , वायु , अग्नि , आकाश , पृथ्वी , जल , हृदय , यम , सूर्योदय और सूर्यास्त और धर्म हमेशा हमारे कार्यों को देखते रहते है और उसके साक्ष्य है .

ज्योतिष शास्त्र मात्र संभावना की ओर संकेत करता है , उस संभावना पर विचार करके विवेक सम्मत बुद्धि से यह निश्चय करना पड़ता है की फल क्या होगा ? जैसे धुएं को देखकर अग्नि का अनुमान हो जाता है , बिलकुल वैसे ही कुंडली की ग्रहस्थिति और उनके पारस्परिक संबधों अर्थात ज्योतिष योगों एवं दशान्तर्दशा के आधार पर संभावना रुपी भावी फल को अनुभव किया जा सकता है. सिद्धांतो के आधार पर पूर्वानुमान करना एक बात है और इसे समझकर विवेक और सम्यक ढंग से "अंतर्ज्ञान " प्रतिभा ( Intuition) का उपयोग कर सुझाव और परामर्श दें ताकि आप अज्ञात को जानकार विपत्तियों में निज पुरुषार्थ से प्रतिकार करते हुए जीवन लक्ष्य को प्राप्त कर सकें.

 षड् दोषा: पुरूषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता

निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध: आलस्यं दीर्घसूत्रता ! पंचतंत्र !

जो विश्व में समृधि पाना चाहते है , उन्हें छः दोषों से दूर रहना चाहिए : लम्बी निद्रा या अज्ञान- हमारे इर्द गिर्द क्या हो रहा है इसकी जानकारी न होना , तन्द्रा ,भय , क्रोध , आलस्य और कंजूसी .

ज्योतिष भविष्य का दर्पण नहीं बल्कि मार्गदर्शक है ....

धन वैभव और ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए मनुष्य अत्यंत प्रयत्नशील रहता है. आप पत्रिकायों और टीवी चैनलों को देख लें तो हजारों तरीकों से ज्योतिष और धर्म शास्त्र का सहारा लेकर कई तरह के विधि-विधान और अनुष्ठान बताएं जा रहे हैं . कई तरह के मंत्र - यन्त्र से वैभव और धन प्राप्ति के अचूक उपाय दिए जा रहे हैं. 

हर विधि विधान और मंत्र-यन्त्र की अपना महत्व और लाभ है . सही , उचित और शास्त्रोक्त रीतियों के अनुसार किये जाने वाले अनुष्ठानो का महत्व है और मनुष्य लाभान्वित भी होता है . हमारे प्राचीन शास्त्रों ने इसका विधिवत उल्लेख किया है. पर यह बात बहुत आवश्यक है की जिस तरह इसे आज समाज में प्रस्तुत किया जा रहा है क्या वह उचित और सही है और क्या हम सर्व प्रकार से प्राचीन ज्ञान को समाज में प्रस्तुत कर रहे हैं. हमारी संस्कृति , सभ्यता और सनातन धर्म कर्म प्रधान रहा है . ज्योतिष और वेदों में उल्लेखित उपाय या अनुष्ठान कोई इन्स्टंट नूडल बनाने के नुस्खे नहीं थे. 

धन , वैभव और ऐश्वर्य प्राप्ति की हर कोई साधना करना चाहता है . हम धर्म , ज्योतिष और प्राचीन ज्ञान के सहारे सही तरीके समझे , जाने और उपयोग में लाये ताकि जीवन को सफल बनाया जा सके .

!! कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती . करमूले तु गोविन्द: प्रभाते करदर्शनम् !! 
हमारे हाथों में ही मां लक्ष्मी , मां सरस्वती और भगवान गोविन्द का निवास है .

गीता में लिखा है : 

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।2.47।।

कर्तव्य-कर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं। अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो ।इसका तात्पर्य है की मन की आप कर्म करते वक़्त परिणामों की चिंता न करें पर आलस्यपन और अकर्मण्यता के शिकार न हो 

तुलसी यह तनु खेत है, मन बच कर्म किसान |
पाप पुण्य द्दै बीज हैं, बबै सो लवै निदान ||

तुलसीदास मनुष्य शरीर की तुलना खेती की जमीन से करते हैं . बुध्धि , वचन और कर्म किसान की भूमिका है जहां अच्छे और बुरे कर्मों का पाप और पुण्य की तरह बीज बोने पर उसी तरह से फसल की प्राप्ति होती है .

नए भविष्य निर्माण के लिए सबसे पहला कदम है अपनी कमियों को समझ कर उन्हें दूर करने का प्रयास करना. हम जो भी करें, उसके लिए हमें शांत, संयमित होना चाहिए. साथ ही अपने कर्मों का सजग रह कर विश्लेषण भी करना चाहिए. अगर हम कमियों को हमेशा सही ही साबित करेंगे और  नकारात्मक कर्मों के लिए प्रवृत्ति में बहते जायेंगे तो हम कभी भी अपने जीवन में उन्नति नहीं कर पायेंगे और न ही भविष्य को संवार पायेंगे .अतः सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है अपनी कमियों को समझना. 

ज्योतिष समय का विज्ञानं है . तिथि , वार, नक्षत्र , योग और कर्म इन पांच चीजों का अध्ययन कर भविष्य में होने वाली घटनायों का आकलन किया जाता है . संभावनायों और भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिष शास्त्र का सही उपयोग परामर्श , मानव जीवन को अनुशासित और जिंदगी के हर पल का एक समुचित मार्गदर्शन के साधन के तौर पर समाज में प्रस्तुत करने की अंत्यत आवश्यकता है . केवल भविष्यवाणियों में सिमित न रह कर , ज्योतिष का आधार लेकर मनुष्य की जीवन की कई समस्यायों का हल निकाला जा सकता है. ज्योतिष भविष्य को बदलता नहीं बल्कि मनुष्य को सही और उचित सलाह देता है . 

मेरा मुख्य उद्देश्य इसी वैदिक और वैज्ञानिक आधार को लेकर जीवन के राह का उचित मार्गदर्शन, बिना किसी बनावट के सही और सत्य रूप में अंतर्ज्ञान (Intuition) का उपयोग करते हुए प्रस्तुत करना है.