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Image is the way others view you. Image is also how you view yourself. Image is generally your physical appearance combined with your personality that is portrayed to others.
 
A personality is the sum total of the physical, mental, emotional, and social characteristics of an individual. So, Image is perception. Personality is the true essence of the individual.
 
The combination of Astrology , Image and Personality makes Road of Success.

व्यक्तित्व आपका दर्पण है आपकी छवि .Personality is your Image 
व्यक्तित्व किसी व्यक्ति की सोच, अनुभूति एवं व्यवहार का आईना होता  है. कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तित्व से ही  पहचाना जाता है ..It is your Image as perceived by or seen by Others.
 
उत्तिष्ठत जाग्रत ,प्राप्य वरान्निबोधत ।
क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया ,दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति ॥ कठ उपनिषद् – 1.3.14 ॥
उठो जागो श्रेष्ठ का बोध करो (अथवा श्रेष्ठ की संगति से प्राप्त करो ) , कारण जीवन का मार्ग उसी प्रकार तेज और दुर्गम है जिस प्रकार छुरे के पैना किये गये धार पर चलना ।, ऐसा ही विद्वान्  लोग कहते हैं .Arise, awake, and learn by approaching the exalted ones,for that path is sharp as a razor’s edge, impassable,and hard to go by, say the wise. 
 
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतः तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः । 
श्रेयो हि धीरोऽभि प्रेयसो वृणीते प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद्वृणीते ॥ कठ उपनिषद् – 1.2.2 ॥
The preferable and the pleasurable approach man.The intelligent one examines both and separates them.Yea, the intelligent one prefers the preferable to the pleasurable,(whereas) the ignorant one selects the pleasurable for the sake of yoga (attainment of that which is not already possessed) and kshema (the preservation of that which is already in possession . दो रास्ते हैं, श्रेय ( कर्म और कल्याण करने वाला ),  प्रेय  (अच्छा लगने वाला है ,आनंद देने वाला )। दोनों मनुष्य के सामने आते हैं । जो बुद्धिमान हैं, जिनके पास सूझ-बूझ  है, समझ है वे श्रेय मार्ग को, कल्याण करने वाले रास्ते को अपनाकर उस पर चलना आरम्भ कर देते हैं .अविवेकी पुरुष  सांसारिक योग और मन को अच्छा लगने वाले कर्म को चुनता है .
हमारा व्यक्तित्व ही हमारी पहचान.....Our Image
आप जिस प्रकार के व्यक्ति हैं, वही आपका व्यक्तित्व है और वह आपके आचरण, संवेदनशीलता तथा विचारों से व्यक्त होता है। किसी व्यक्ति का पूरा स्वभाव तथा चरित्र ही व्यक्तित्व कहलाता है। यही व्यक्तित्व उसका दर्पण है…उसकी  छवि ..इमेज ...व्यक्तित्व विभिन्न परिस्थितियों में हमारे आचरण को, हमारे गुणों को, चिंतन मनन को, ज्ञान को, रहन-सहन को, आत्मविश्वास को दर्शाता है...यही से बनती छवि ..Image .
 
व्यक्तित्व दो प्रकार के होते हैं- १.बाह्य, २. आन्तरिक
१. बाह्य व्यक्तित्व : - यह स्थूल शरीर से सम्बन्ध रखता है। व्यक्ति का बाहरी रूप, रंग, कद, स्वास्थ्य, आहार-विहार, आदतें, बातचीत करने का तरीका, व्यवहार, वेश विन्यास आदि सम्मिलित रूप से किसी व्यक्ति के बाह्य व्यक्तित्व को बनाते हैं। 
२. आन्तरिक व्यक्तित्व : - यह व्यक्ति के सूक्ष्म और कारण शरीर से सम्बन्ध रखता है। व्यक्ति का चिन्तन, विचार, स्भाव, चरित्र, संस्कार, लोभ, मोह, अहंकार जनित समस्त भावनाएँ, श्रद्धा संवेदना आदि सभी प्रकार के सकारात्मक और नकारात्मक तत्वों से व्यक्ति का आन्तरिक व्यक्तित्व बनता है। 
 
आन्तरिक व्यक्तित्व ही वास्तव में व्यक्ति का वास्तविक व्यक्तित्व होता है, क्योंकि उसी की परछाई बाह्य व्यक्तित्व में झलकती है. इसी आधार पर व्यक्ति स्वस्थ, सुन्दर, सेवा, सहकारिता, आत्मविश्वास सम्पन्न, परोपकारी, उच्च आदर्श से सम्पन्न या  इसके विपरीत होता है.
 
हमारा बात-चीत का तरीका, हमारे संस्कार, हमारी सकारात्मक या नकारात्मक सोच,  हमारी पसंद-नापसंद, बातचीत में हमारी सहजता, हमारे आचार -विचार, मान्यताएं, हमारी व्यवहार कुशलता, विषम परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता, कुछ नया सीखने की जिज्ञासा, मनोभावों का नियंत्रण, हमारी शारीरिक व मानसिक प्रबलता, हमारा आत्मविश्वास, इत्यादि.अतः जो भी हम हैं वही हमारा व्यक्तित्व है, जो हमारे हर निर्णय और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से हमारे आने वाले कल का निर्माण भी करता है
 
व्यक्तित्व निर्माण  आज के तेजी से बदलते समय और समाज में विकास की गति के साथ साथ उसी दर से स्वंय  को भी विकसित करने के लिए आवश्यक है. किसी व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व व उसके समाज की परिस्थितियों में जितना ज्यादा अंतर होता है, व्यक्तित्व निर्माण की आवश्यकता भी उतनी ज्यादा बढ़ जाती है. हर वो व्यक्ति जो स्वयं को बदलते सामजिक परिवेश में सबसे बेहतर प्रस्तुत कर पाता है वही सफलता को प्राप्त करता है. व्यक्ति का सकारात्मक/ नकारात्मक , स्वीकार्यता/अस्वीकार्यता , सफलता/असफलता , अच्छा / बुरा  क्योंकि हमारा व्यक्तित्व ही हमारी पहचान बन जाता है,यही समाज में हमारी छवि बन जाती है…  और हमारे भविष्य को भी निर्धारित करता है इसलिए हमें इसके प्रति सजग रहना बहुत ज़रूरी है.